रेबीज एक जानलेवा बीमारी है, लेकिन सही समय पर इलाज मिलने से इसे 100% रोका जा सकता है। लुई पाश्चर द्वारा विकसित रेबीज वैक्सीन आज के समय में बेहद प्रभावी है। इसके बावजूद, हाल ही में ऐसी कई खबरें आई हैं जहाँ वैक्सीन लगवाने के बाद भी मरीजों की मृत्यु हो गई।
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| रेबीज वैक्सीन फेल क्यों हो जाती है? (Why Rabies Vaccine Fails) |
क्या वैक्सीन खराब है? या हमसे इलाज में कोई चूक हो रही है? डॉ. पुनीत अग्रवाल (लैप्रोस्कोपिक एवं लेजर सर्जन), जिन्होंने हाल ही में GARC से रेबीज एजुकेटर का सर्टिफिकेट कोर्स पूरा किया है, इस विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा कर रहे हैं।
रेबीज वैक्सीन फेल होने के मुख्य कारण
डॉ. अग्रवाल के अनुसार, वैक्सीन फेल होने की संभावना तब बढ़ जाती है जब हम इन 4 श्रेणियों में गलतियां करते हैं:
1. इलाज में देरी और गलत प्रोटोकॉल (Delay in Treatment)
कुत्ता या कोई भी जानवर काटने के बाद समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। वायरस और एंटीबॉडीज के बीच एक दौड़ चलती है। अगर वायरस दिमाग (Brain) तक पहले पहुँच गया, तो मौत निश्चित है।
इम्यूनोग्लोबुलिन (Immunoglobulin) की कमी: अगर घाव गहरा है (Grade 3), तो सिर्फ वैक्सीन काफी नहीं है। इसमें 'बनी-बनाई एंटीबॉडीज' यानी इम्यूनोग्लोबुलिन या मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज लगवाना अनिवार्य है।
खुराक (Dose) अधूरी छोड़ना: इंट्रा-मस्कुलर वैक्सीन के 5 इंजेक्शन (0, 3, 7, 14, 28 दिन) का पूरा कोर्स करना जरूरी है। कोर्स अधूरा छोड़ने पर शरीर में पर्याप्त सुरक्षा नहीं बन पाती।
2. घाव की सही सफाई न करना (Wound Management)
अस्पताल भागने से पहले सबसे जरूरी काम घर पर ही करना चाहिए।
घाव को कम से कम 15 मिनट तक बहते पानी और साबुन से धोना चाहिए।
ऐसा करने से वायरस का लोड काफी कम हो जाता है और वैक्सीन अधिक प्रभावी ढंग से काम कर पाती है। इसके बाद स्पिरिट या बीटाडिन का उपयोग करें।
3. वैक्सीन लगाने की गलत जगह (Incorrect Administration)
वैक्सीन हमेशा हाथ की डेल्टॉइड मांसपेशी (Deltoid Muscle) में लगनी चाहिए। अगर इसे कूल्हे (Gluteal region) पर लगाया जाता है, तो फैट (वसा) के कारण इसका अवशोषण (Absorption) सही से नहीं होता और एंटीबॉडीज नहीं बन पातीं।
4. वैक्सीन की गुणवत्ता और कोल्ड चेन (Cold Chain Maintenance)
वैक्सीन को एक निश्चित ठंडे तापमान पर रखना अनिवार्य है। अगर केमिस्ट या अस्पताल ने इसकी कोल्ड चेन मेंटेन नहीं की है, तो वैक्सीन बेअसर हो सकती है। इसके अलावा, बाजार में मौजूद नकली दवाओं से भी सावधान रहने की जरूरत है।
5. Fake vaccines
मरीज की अपनी स्थिति (Patient Factors)
यदि मरीज की इम्युनिटी कमजोर है (जैसे कैंसर, HIV, या स्टेरॉयड का सेवन), तो वैक्सीन का असर कम हो सकता है। ऐसे मामलों में 5वीं डोज के दो हफ्ते बाद ब्लड टेस्ट कराकर एंटीबॉडी लेवल की जांच करानी चाहिए।
निष्कर्ष
रेबीज वैक्सीन 100% प्रभावी है, बशर्ते उसे सही समय पर, सही तरीके से और पूरे कोर्स के साथ लिया जाए। जागरूक रहें और अपनी व अपनों की जान बचाएं।
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