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Fistula bhagandar kya hota hai Fistula Symptoms Male Female fistula Meaning Surgery in Hindi

भगन्दर को जड़ से खत्म करने का उपाय दवा , भगंदर का बिना आपरेशन इलाज, फिस्टुला का स्थाई इलाज    How to heal a fistula without surgery 

बवासीर तथा फ़िशर के बाद गुदा द्वार पर  होने वाली तीसरी प्रमुख बीमारी है भगंदर । इसे हम नासूर या अंग्रेजी में फिशचुला के नाम से भी जानते हैं ।
हमारे गुदाद्वार के चारों तरफ़ मांसपेशियों के बीच में ग्रंथियों में इन्फेक्शन होकर कभी कभी फोड़ा बन जाता है । अगर ये फोड़ा गुदाद्वार में अंदर फट जाता है तो सारा पस मल के साथ बाहर निकल जाता है । मरीज़  ठीक हो जाता है, उसे कुछ मालूम भी नहीं पड़ता है । अगर ये फोड़ा अंदर फटने के साथ गुदा के आसपास की खाल पर बाहर फट जाता है तो उसे हम भगन्दर का बनना कहते हैं । ये अपने आप सही नहीं होता है । इसे सही करने के लिए हमें कुछ कारगर कदम उठाने पड़ते हैं ।




कुछ व्यक्तियों में फिस्टुला होने की संभावनाएँ अधिक होती हैं जैसे 
अधिक वजन वाले लोग 
ज्यादा नमक का सेवन करने से 
डायबिटीज होने पर 
कोलेस्ट्रॉल बढ़े होने पर 
सिगरेट तथा शराब के सेवन से 
ज़्यादा मिर्च मसालेदार ख़ाना खाने पर 
जो लोग एक ही जगह बैठे रहते हैं 
व्यायाम नहीं करने वाले व्यक्ति 
बिना रेशे युक्त ख़ाना खाने पर
गुदा पर पहले कोई ऑपरेशन हुआ हो 
जो लोग टॉयलेट सीट पर ज्यादा देर तक बैठते हों
टायलेट में बहुत जोर लगाना 

फिस्टुला इन लोगों में भी हो सकता है 
आँतों की बीमारियों में eg Crohn’s disease 
आँतों की टीबी होने पर
बिजली की सिकाई के बाद 
सेक्स से रिलेटेड बीमारियों में HIV
कुछ खाल की बीमारियों में Actinomycosis
चोट लगने पर

भगन्दर होने पर मरीज को गुदा में दर्द महसूस होता है । ये दर्द पस एकत्रित होने के कारण होता है । फोड़ा फटने पर पस निकल जाता है तथा दर्द कम या खत्म हो जाता है । इसके अतिरिक्त मरीज खुजली आँव खून आना बुखार सूजन की शिकायत भी करते हैं ।

बीमारी का पता एक गुदा रोग विशेषज्ञ देख कर तथा अपनी अंगुली से चेक अप करके कर सकता है (DRE) MRI द्वारा इसका पूरा फैलाव देखा जा सकता है ।
भगन्दर चूहे के बिल की तरह होता है ।ऊपर से एक छोटा मुँह होता है लेकिन अंदर ही अंदर ये चारों तरफ़ फैला होता है ।
एक बार भगन्दर बनने पर ये दवाइयों से ठीक नहीं होता है। इसका पक्का इलाज करवाना ज़रूरी होता है । अगर इसका पक्का इलाज नहीं करवायें तो पस इन्फेक्शन चारों तरफ़ फैलता जाता है । लंबे समय तक भगन्दर बने रहने पर कभी कभी कैंसर बन जाने का खतरा रहता है ।
एंटीबॉयोटिक्स लेने पर ये दब जाता है लेकिन ठीक नहीं होता है । थोड़े दिन बाद ये फिर से उभर आता है ।
आपके डॉक्टर आपको ये बता सकते हैं की आपके लिए कौन सी विधि अच्छी रहेगी । आजकल लेज़र से भी इसका इलाज हो रहा है ।
फिस्टुला के पुराने आपरेशन में पूरा घाव खोल दिया जाता है इसमें टाँके नहीं लगते हैं । 
आजकल नयी विधि से भी आपरेशन हो रहे हैं, जिसमें कम काटा पीटी होती है ।

आपका सर्जन आपके लिए सबसे अच्छी विधि का चुनाव कर सकता है। 
फिस्टुला का पक्का इलाज ज़रूरी है । बिना इलाज के चूहे के बिल की तरह ये अंदर ही अंदर फैलता रहता है । इन्फेक्शन होने पर ये बड़े फोड़े की तरह बन जाता है जो जानलेवा भी सिद्ध होता है । इसीलिए इसे बिना इलाज के न छोड़ें ।

डॉक्टर पुनीत अग्रवाल MS FISCP 
Fistula doctor near me 
www.drpuneetagrawal.com 

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