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After piles surgery exercise - When to start what to start

 After piles surgery exercise - When to start what to start







आज पाइल्स एक सामान्य समस्या बन गयी है। पचास वर्ष के पचास प्रतिशत लोग इस बीमारी के चपेट में आते जा रहे हैं। पाइल्स अथवा बवासीर होने का मुख्य कारण है कब्जियत तथा हमारी अव्यस्थित जीवन शैली। अन्य प्रमुख कारण  हैं - शौच के समय अतिरिक्त बल लगाना, अधिक समय तक पौटी में बैठे रहना, लम्बे समय तक दस्त लगे रहना, अधिक वजन होना, अधिक वजन उठाना (weight lifting ), कम  रेशे वाला खाना, गर्भावस्था, गुदा मैथुन आदि। 

प्रारंभिक अवस्था में इसका इलाज बिना ऑपरेशन के संभव है लेकिन बीमारी की अवस्था बढ़ने पर ऑपरेशन या लेज़र या इंजेक्शन आवश्यक हो जाता है। 

किसी भी प्रकार के सर्जिकल इलाज के बाद हमें किस प्रकार का व्यायाम करना चाहिए और किस समय व्यायाम प्रारम्भ करना चाहिए आज इसी विषय पर आपसे चर्चा करूँगा। 

कीगेल व्यायाम 

क्या न करने से पहले में आपको बताऊंगा की आप को कौन से कसरत करनी चाहिए। ऑपरेशन के बाद जब आप चलने फिरने लगें, कमजोरी न महसूस कर रहें तो इसे प्रारम्भ करें। 

लेटे लेटे या बैठ कर इसे करें।  साँस को अंदर खींच  कर रोक लें। अब अपने गुदाद्वार को टाइट करें जैसे आप पेट कि गैस को बाहर  निकलने से रोक रहे हो।  पाँच सेकंड तक रोकने के बाद ढीला छोड़ दें। अब पुनः इसे टाइट करें। इसे सुबह शाम दस दस बार करें। अपने पेट की या जाघों की मांसपेशियों का बिलकुल भी प्रयोग न करें। 

व्यायाम 

किसी भी ऑपरेशन के बाद कड़ी मेहनत वाले व्यायाम न करें। ऐसे व्यायाम जिन्हें करने से गुदा मार्ग पर तनाव बढ़ता हो जैसे भारी वजन उठाना, दौड़ लगाना, तेज चलना, उठक बैठक लगाना, घुड़सवारी, दौड़ भाग वाले खेल जैसे फुटबॉल हॉकी आदि प्रारम्भ न करें। 

सर्व प्रथम घाव को पूरी तरह से भर जाने दें। इसे भरने में दो से तीन सप्ताह का समय लगता है। अपने शरीर में कमजोरी को महसूस न होने पर ही धीरे धीरे हल्का व्यायाम प्रारम्भ करें। शुरुआत में धीरे धीरे टहलना प्रारम्भ करें। तत्पश्चात सामान्य महसूस होने पर ही टहलने की गति तथा समय बढ़ाते रहें। टहलने से रक्त का प्रवाह बढ़ता है जिससे रक्त गुदा मार्ग पर एकत्रित नहीं होता है तथा खून बहने की समस्या कम हो जाती है। 

ऐसे व्यायाम न करें जिन्हें करने पर आप गुदा मार्ग पर तनाव महसूस करते हों। 

ऑपरेशन के बाद कमजोरी न लगने पर तथा सामान्य महसूस होने पर गतिविधि बढ़ाते रहें, मेहनत वाले व्यायाम भी अब धीरे धीरे शुरू करें। कोई भी कसरत एकदम से बहुत ज्यादा न करें। जिम में भी धीरे धीरे व्यायाम की गति बढ़ाएं। अपने शरीर की भाषा  को पहचानें, सामान्य महसूस होने पर ही आगे बढ़ें। ऐसे योग न करें जिन्हें करने से गुदा मार्ग में तनाव आता हो। 

ऑपरेशन /लेज़र/इंजेक्शन के बाद एक ही जगह पर बहुत देर तक न बैठें। बैठने के लिए डोनट तकिये का प्रयोग करें। ये बाजार में उपलब्ध हैं। (न मिलने पर आप मुझसे whatsapp पर लिंक ले सकते हैं।) ऑफिस में हर आधे घंटे बाद खड़े होकर कुछ टहलें। 

पूजा के समय शंख न बजाएं। 

अपने सर्जन द्वारा बताये गए मलहम का प्रयोग पॉटी जाने से पहले तथा बाद में अवशय करें। 

पॉटी के बाद गुनगुने पानी में बैठें Sitz Bath 

पॉटी के बाद सूखे टॉयलेट पेपर का प्रयोग बिलकुल भी न करें। गीले टॉयलेट पेपर या टिसू  से ही पोंछें। 

पॉटी करते समय जोर न लगाएं । 

संक्षेप में अपनी जीवन शैली धीरे धीरे सक्रिय करते रहें। 


मुझसे कुछ पूछना चाहें तो में whatsapp  9837144287 पर उपलब्ध हूँ। 


डॉ पुनीत अग्रवाल 

प्रोफेसर 

मेडिकल कॉलेज 

आगरा 


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